देशभर में आज 27 जून से भगवान जगन्नाथ की प्रसिद्ध रथयात्रा की शुरुआत हो गई है. यह पवित्र यात्रा 8 जुलाई तक चलेगी.

हर साल आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से यह परंपरा होती है. सबसे भव्य आयोजन ओडिशा के पुरी में होता है. 

रथयात्रा में तीन अलग-अलग रथ बनते हैं. भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के लिए ये रथ निकाले जाते हैं. 

आपको बता दें पुरी में भगवान जगन्नाथ का विशाल मंदिर स्थित है. इस अवसर पर आइए जानते हैं इन तीनों रथों की विशेष बातें.

भगवान जगन्नाथ का रथ – नंदीघोष भगवान जगन्नाथ के रथ को नंदीघोष कहा जाता है. इसकी ऊंचाई लगभग 45.6 फीट होती है. यह रथ लाल और पीले रंग का होता है. इसमें 16 पहिए लगाए जाते हैं.

रथ के सारथी का नाम दारुक है. इसे गरुड़ध्वज भी कहा जाता है. इस पर सफेद रंग के चार घोड़े जुते होते हैं. रथ की रक्षा गरुड़ देव करते हैं. इसके ऊपर लगा ध्वज त्रैलोक्यमोहिनी कहलाता है. 

भगवान बलभद्र का रथ – तालध्वज बलभद्र का रथ सबसे आगे चलता है. इसे तालध्वज कहते हैं. इसकी ऊंचाई 44 फीट होती है. यह रथ लाल और हरे रंग में सजाया जाता है. इसमें कुल 14 पहिए होते हैं.

इसके सारथी मातलि कहलाते हैं. रथ में काले रंग के चार घोड़े जुते होते हैं. वासुदेव देवता इसकी रक्षा करते हैं. इस रथ का ध्वज उन्नानी कहा जाता है.

देवी सुभद्रा का रथ – दर्पदलन तीसरा रथ देवी सुभद्रा का होता है. यह भगवान बलराम के रथ के पीछे चलता है. इसकी ऊंचाई करीब 44.6 फीट होती है. रथ का रंग लाल और काला होता है. इसमें 12 पहिए लगाए जाते हैं.

इस रथ के सारथी अर्जुन हैं. इसमें लाल रंग के चार घोड़े जुते होते हैं. देवी जयदुर्गा इस रथ की रक्षा करती हैं. रथ पर लगा झंडा नादम्बिका कहा जाता है.

रथ यात्रा की खास परंपरा रथ यात्रा में सबसे आगे भगवान बलभद्र का रथ चलता है. उसके बाद देवी सुभद्रा का रथ बढ़ता है. सबसे पीछे भगवान जगन्नाथ का रथ चलता है.

तीनों रथ अपने अलग रंग, ऊंचाई और नामों से पहचाने जाते हैं. यही वजह है कि यह रथयात्रा पूरी दुनिया में आस्था और परंपरा का अनोखा उदाहरण मानी जाती है.