एकमात्र ज्योतिर्लिंग जहां महादेव और माता पार्वती के साथ खेलते हैं चौसर, जानें नाम
गंगा से भी ज्यादा पावन नदी नर्मदा, इसके किनारे से सटा ओंकार पर्वत और इस पर्वत पर निवास करते एकलिंगनाथ यानी महादेव. सचमुच यह स्थान देवताओं का निवास स्थान है.
यहां नर्मदा नदी के दोनों किनारों पर दो प्रमुख मंदिर हैं ओंकारेश्वर और ममलेश्वर. यहां दोनों ज्योतिर्लिंग मिलकर एक होते हैं और कहलाते हैं ओंकारममलेश्वर. द्वादश ज्योतिर्लिंग में इसका स्थान चौथा है.
मान्यता है कि रात्रि के समय भगवान शिव यहां पर प्रतिदिन विश्राम करने के लिए आते हैं. मान्यता यह भी है कि इस मंदिर में महादेव माता पार्वती के साथ चौसर भी खेलते हैं.
यही कारण है कि रात्रि के समय यहां पर चौपड़ बिछाई जाती है और मंदिर के भीतर पट बंद होने के बाद रात के समय परिंदा भी पर नहीं मार पाता है.
इस मंदिर में एक ऐसी आरती भी होती है, जिसे न तो कोई भक्त देख सकता है और न ही मंदिर का कोई अन्य कर्मचारी उसमें उपस्थित होता है.
यह ओंकारेश्वर की 'शयन आरती' है, जिसे सिर्फ एक पुजारी अकेले गर्भगृह में करता है और इस दौरान मंदिर के कपाट भक्तों के लिए पूर्णतः बंद हो जाते हैं.
ओंकारेश्वर में 68 तीर्थ हैं जिसके बारे में कहा जाता है कि यहां 33 कोटि देवी-देवता अपने परिवार के साथ निवास करते हैं.
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्थित है. मंदिर नर्मदा नदी में मांधाता द्वीप या शिवपुरी नामक द्वीप पर स्थित है.
मान्यता है कि ओंकारेश्वर में स्थापित लिंग किसी मनुष्य के द्वारा गढ़ा, तराशा नहीं, बल्कि प्राकृतिक शिवलिंग है. यह शिवलिंग हमेशा चारों ओर से जल से भरा रहता है.
ओंकारेश्वर मंदिर नर्मदा के दाहिने तट पर है, जबकि बाएं तट पर ममलेश्वर है. यहां की पवित्र नदी नर्मदा जो ओंकारममलेश्वर महादेव के चरण पखारती है.
नर्मदा नदी से निकले इन नर्मदेश्वर शिवलिंग को बाणलिंग भी कहा जाता है. जिसे प्राण प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं होती और यह कहीं भी स्थापित किए जा सकते हैं और किसी भी रूप में इनकी पूजा की जा सकती है.
महादेव के आशीर्वाद से नर्मदा पवित्र नदियों के रूप में पूजी जाने लगी. यह पूरे विश्व में इकलौती ऐसी नदी है, जो अपनी दिशा से बिल्कुल विपरीत दिशा में बहती है.