सावन आते ही सड़कों पर नजर आते हैं भगवा वस्त्र पहने कांवड़िए जानिए इस यात्रा की पूरी कहानी
श्रद्धालु गंगा नदी से पवित्र जल लाते हैं और शिवलिंग पर अर्पित करते हैं इसे ही कांवड़ यात्रा कहते हैं.
दो घड़े, जिन्हें डंडे पर लटकाया जाता है, और इसे कंधे पर रखा जाता है.
मान्यता है कि गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करने से सारे पाप दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
सावन के महीने में खासकर शिवरात्रि और सोमवार के दिन इस यात्रा का विशेष महत्व होता है.
हरिद्वार, ऋषिकेश, गंगोत्री, वाराणसी जैसे स्थानों से कांवड़िए गंगाजल लेकर निकलते हैं.
सड़कें भगवा रंग में रंग जाती हैं। कांवड़ियों के लिए अलग लेन और सुरक्षा की व्यवस्था की जाती है.
कांवड़िए गंगाजल शिवलिंग पर चढ़ाते हैं और ‘बोल बम’ के जयकारे लगाते हैं.
यात्रा में नंगे पांव चलना, कांवड़ को जमीन पर न रखना, गंगाजल न गिराना, ये यात्रा के मुख्य नियम हैं.
बोल बम”, “हर हर महादेव” जैसे गीत और डीजे पर बजती भक्ति धुन यात्रा का जोश बढ़ा देती हैं.
जगह-जगह भंडारे लगाए जाते हैं। भक्तों को भोजन, पानी और मेडिकल सुविधा मुफ्त दी जाती है।
कांवड़ यात्रा केवल यात्रा नहीं, बल्कि भोलेनाथ के प्रति अटूट भक्ति और श्रद्धा का प्रतीक है.