किस दिशा में मुंह करके शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए जल, भूलकर भी न करें ये गलतियां
आज से सावन महीने की शुरुआत हो गई है. इस पावन महीने में शिव लिंग पर जल चढ़ाने की खास अहमियत होती है.
लेकिन कई बार जाने-अनजाने में शिवजी पर जल चढ़ाते समय लोगों से कुछ गलतियां हो जाती हैं.
ये गलतियां धार्मिक दृष्टि से अनुचित मानी जाती है. ऐसे में आइए जानते हैं भगवान शिव पर जल चढ़ाने का सही तरीका और नियम.
सबसे पहले आप सुबह उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. साफ कपड़े पहनें बगैर स्नान किए शिवलिंग को कभी जल अर्पित न करें.
इसके अलावा तांबे के एक स्वच्छ लोटे में गंगाजल या ताजा स्वच्छ पानी लें. उसमें अक्षत, चंदन और पुष्प डालें. यह जल भगवान शिव को अर्पण करें.
पूजा स्थल या शिव मंदिर में पूर्व दिशा या ईशान कोण की ओर मुंह करके खड़ें हों. जल का पात्र दोनों हाथों से पकड़े और अर्पित करें.
जल धीरे-धीरे अर्पण करें. सीधे खड़े होकर जल न चढ़ाएं, थोड़ा झुककर अर्पण करें. ताकि शिवलिंग से गिरता जल आपके पैसों तक न आए.
वहीं जलाभिषेक के दौरान ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप करना न भूले. जल खत्म होने पर हाथ जोड़कर महादेव को नमन करें.
जल अर्पण के बाद शिवजी को बेलपत्र, भांग, शमी पत्र, शहद, अक्षत, धूप, चंदन और दीप आदि चीजें अर्पित करें. ये सभी शिवजी को अति प्रिय है.
शिवलिंग से कुछ दूरी बनाकर बैठें फिर श्रद्धा पूर्वक चालीसा का पाठ करें और बाद में भगवान की आरती उतारें.
यदि पूजा में कोई चीजे रह गई हो तो भगवान से क्षमा मांग लें फिर अपनी मनोकामनाओं के लिए प्रार्थना करें और श्रद्धा के साथ पूजा पूरी करें.