ईंटें भी अब लेने लगी हैं ‘सांस', Netherlands में हरे-भरे इमारतों की शुरुआत

नीदरलैंड्स में एक अनूठी ग्रीन-टेक खोज पर काम हो रहा है, यहाँ ऐसी ईंटों का इस्तेमाल शुरू हो गया है, जो खुद हवा का संचार कर सकती हैं.

इन ईंटों में सूक्ष्म छिद्र यानी माइक्रोपोरस संरचना होती है, इन महीन छिद्रों से नमी और हवा का आना-जाना बना रहता है.

इस खास बनावट से इमारतों में तापमान प्राकृतिक रूप से नियंत्रित रहता है, गर्मियों-ठंड में एसी और हीटर का खर्च कम हो जाता है.

यह ईंटें वातावरण की नमी को सोखती और धीरे-धीरे छोड़ती हैं, इससे घर के भीतर की हवा हमेशा ताजी और स्वच्छ रहती है.

शहरों में बढ़ती गर्मी से निपटने के लिए यह तकनीक बेहद कारगर साबित हो सकती है.

शहरों में बढ़ती गर्मी से निपटने के लिए यह तकनीक बेहद कारगर साबित हो सकती है.

नीदरलैंड्स ही नहीं, बल्कि दुनिया के तमाम ग्रीन बिल्डिंग प्रोजेक्ट्स में यह नवाचार नई उम्मीद जगा रहा है.

मजबूत और टिकाऊ सामग्री से बनी ये ईंटें इमारतों को पूरी तरह सस्टेनेबल बनाती हैं.

अब ऐसे घर जो सच में सांस लेते हैं और भीतर की हवा को शुद्ध बनाए रखते हैं, कोई कल्पना नहीं, बल्कि हकीकत बनते जा रहे हैं.