kanwar Yatra समय भूलकर न करें ये गलतियाँ, वरना हो सकता है अनर्थ

सावन को भगवान शिव का प्रिय महीना माना जाता है, जिस दौरान की गई पूजा-पाठ का फल भक्तों को जरूर मिलता है.

महादेव को प्रसन्न करने के लिए हर साल बड़ी संख्या में भक्तजन सावन में कांवड़ यात्रा करते हैं, जो कि एक कठिन तपस्या है.

भगवान शिव के भक्त गंगा, नर्मदा, शिप्रा या गोदावरी जैसी किसी भी एक पवित्र नदी से जल को कांवड़ से ढोकर लाते हैं.

उस जल को अपने घर के पास मौजूद प्राचीन शिव मंदिर में शिवलिंग पर अर्पित करते हैं.

इस साल 11 जुलाई, दिन शुक्रवार से कांवड़ यात्रा शुरू हो गई है, जबकि जलाभिषेक 23 जुलाई 2025 को होगा.

मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन और नियमबद्ध होकर ये यात्रा संपन्न करते हैं, केवल उन्हें ही अपनी तपस्या का फल मिलता है.

कांवड़ यात्रा के दौरान भक्त का नंगे पैर चलना जरूरी है, लेकिन किसी व्यक्ति को कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो ऐसी परिस्थिति में वह चप्पल पहन सकता है.

झूठे मुंह से कांवड़ को नहीं उठाना चाहिए. भोजन करने के बाद स्नान करके ही कांवड़ को उठाएं.

कांवड़ उठाने के बाद गलती से भी उसे कहीं पर भी जमीन पर न रखें, यदि आप ऐसा करते हैं, तो आपकी यात्रा को पूरा नहीं माना जाएगा. कांवड़ को आप किसी स्टैंड या पेड़ की डाली पर लटका सकते हैं.

यात्रा के दौरान यदि किसी कांवड़िए को मल या मूत्र त्याग करना है, तो पहले वह कांवड़ को स्टैंड या पेड़ की डाली पर लटकाएं और कांवड़ से बहुत दूर जाकर मल-मूत्र त्याग करें. हालांकि कांवड़ को फिर से उठाने से पहले स्नान करना जरूरी होता है.

यात्रा के दौरान तामसिक भोजन न करें और न ही नशे वाली चीजों का इस्तेमाल करें.

कांवड़ या कलश पर पैर नहीं लगने चाहिए क्योंकि इससे वह अशुद्ध हो जाती है.

कांवड़ या कलश पर पैर नहीं लगने चाहिए क्योंकि इससे वह अशुद्ध हो जाती है.