सावन में पुत्रदा एकादशी पर करें व्रत, संतान सुख का मिलेगा वरदान
सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है और सावन महीने की एकादशी को विशेष माना गया है. जब श्रीहरि विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं और सृष्टि का संचालन करते हैं.
सावन महीना 11 जुलाई से 9 अगस्त तक चलेगा. ऐसे में आइए जानते हैं इस बीच पुत्रदा एकादशी कब पड़ेंगी.
वैदिक पंचांग के अनुसार, 05 अगस्त को सावन पुत्रदा एकादशी मनाई जाएगी. यह पर्व हर साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है.
सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है. इसके लिए एकादशी तिथि पर न केवल लक्ष्मी नारायण जी की, बल्कि भगवान शिव की भी भक्ति भाव से पूजा की जाती है.
धार्मिक मत है कि सावन पुत्रदा एकादशी व्रत करने से साधक के सुख-सौभाग्य और वंश में वृद्धि होती है. इस व्रत को करने से पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है. साथ ही सुख और सौभाग्य में भी वृद्धि होती है.
सावन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 04 अगस्त को सुबह 11 बजकर 41 मिनट पर शुरू होगी. वहीं, 05 अगस्त को दोपहर 01 बजकर 12 मिनट पर एकादशी तिथि का समापन होगा.
वहीं, पुत्रदा एकादशी का पारण 06 अगस्त को सुबह 05 बजकर 45 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 26 मिनट तक किया जाएगा.
साधक सुविधा अनुसार समय पर स्नान-ध्यान के बाद लक्ष्मी नारायण जी की पूजा कर व्रत खोलें.
पुत्रदा एकादशी के दिन शिववास योग का भी संयोग बन रहा है. शिववास दोपहर 01 बजकर 12 मिनट से शिववास योग का निर्माण होगा. इस समय देवों के देव महादेव कैलाश पर मां पार्वती के साथ रहेंगे.