जानिए ऐसा कौन सा देश है जहां रोटी और पानी भी किसी ख्वाब से कम नहीं
अफ्रीका के पूर्वी भाग में बसा हुआ साउथ सूडान साल 2011 में सूडान से अलग होकर एक आजाद देश बन गया था.
वर्तमान में इस देश की आबादी लगभग 1.3 करोड़ है, और इसकी राजधानी जुबा है.
आंतरिक युद्ध और आर्थिक अस्थिरता ने देश को इतना डुबा दिया कि वहां रहने वाले लोगों के लिए जिंदा रहना भी एक चुनौती ही बन गई है.
गरीबी में आदमी जिंदा तो होता है लेकिन उस जिंदगी को जीने के लिए दो वक्त की रोटी और कभी-कभी तो पीने का पानी भी लग्जरी से कम नहीं होता है.
दुनिया के अमीर देशों में लोगों की ऐश से भरपूर जिंदगी की चर्चा तो आमतौर पर की जाती है लेकिन गरीब देशों की बातें या वहां के आम जीवन बिताने वाले लोगों के बारे में जानने में ज्यादा लोग इच्छुक नहीं होते हैं.
साल 2024 में इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड ने GDP के लिहाज से भी साउथ सूडान को सबसे गरीब देश बताया है.
वर्तमान में साउथ सूडान की 82 फीसदी जनता गरीबी में है. अगर बात करें वहां के ग्रामीण इलाकों की तो वहां शायद लोगों तक एक दिन में एक वक्त की रोटी भी नहीं पहुंच रही है.
यूएन और कई वैश्विक स्तर की एजेंसियां वहां बेशक लोगों के लिए काम कर रही हैं लेकिन हालत इतनी खराब है कि लोगों का आम जीवन जीना भी मुश्किल हो गया है.
9 जुलाई, साल 2011 में दक्षिण सूडान के अलग होने के बाद ही स्थिति तो खराब हो गई थी. जिसके बाद देश के लोग साल 2013 और साल 2016 में आंतरिक युद्ध से जूझे जिससे वहां की हालत और ज्यादा बिगड़ गई.
अप्रैल, साल 2019 में तत्कालीन ओमर अल बशीर की सरकार गिरने के बाद से साउथ सूडान नरक समान होता चला गया.
साल 2022 में आई एक रिपोर्ट के अनुसार, 70 फीसदी सूडान की जनता ऐसी है जो भूखमरी की कगार पर है. देश में एक तो अर्थव्यवस्था बेहद कमजोर है.
बच्चों को शिक्षा का अच्छा मौका नहीं मिल पाता है, न बीमार को समय से इलाज और अगर लोगों को एक या दो समय का खाना मिल जाए, तो वे उसे ही अच्छी जिंदगी मानने को तैयार हैं.