मानसून में ना मुरझाए तुलसी, अपनाएं ये ज़रूरी टिप्स

बारिश की नमी और कम रोशनी तुलसी के पौधे को कमजोर कर सकती है, सड़न, फंगस और कीड़े इसका रूप बिगाड़ सकते हैं.

मानसून में रोज पानी देने की ज़रूरत नहीं, मिट्टी को चेक करें — अगर गीली है, तो पानी न डालें.

गमले के नीचे ड्रेनेज होल ज़रूर होने चाहिए ताकि पानी जमा न हो और जड़ें सड़ें नहीं.

मानसून में सूरज कम दिखता है, फिर भी तुलसी को धूप देना ज़रूरी है, खिड़की, बालकनी या छत बेस्ट हैं.

बंद कमरे या कोनों में तुलसी को न रखें, खुले और हवादार स्थान में रखें ताकि फंगल संक्रमण न हो.

नीम तेल, हल्दी पानी या घरेलू जैविक कीटनाशक सप्ताह में 1 बार छिड़कें.

पीले, सूखे या सड़े हुए पत्तों को समय-समय पर साफ करें, इससे पौधा ताज़ा और स्वस्थ बना रहेगा.

गमले को ज़मीन से थोड़ा ऊपर रखें ताकि पानी का बहाव नीचे हो और नमी कम हो.

मानसून में बहुत ज्यादा जैविक खाद डालने से फफूंद लग सकती है, महीने में एक बार वर्मीकम्पोस्ट काफी है.

हर 3-4 दिन में गमले की दिशा बदलें ताकि पूरा पौधा बराबर बढ़े.

तुलसी का पौधा सिर्फ औषधीय नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत भी है, इस मानसून में उसका ध्यान रखें.