नीलगिरी का तेल एक प्राकृतिक औषधि है, जिसके पत्तों से निकाला गया तेल विशेष रूप से गुणकारी माना जाता है.
वैज्ञानिक शोधों से पता चला है कि नीलगिरी के तेल में सिनेओल और अल्फा-पाइनिन रसायन होते हैं.
यह मांसपेशियों के दर्द, गठिया, साइटिका और जोड़ों के दर्द जैसी समस्याओं में राहत प्रदान करता है.
सर्दी, खांसी, और बंद नाक में भाप लेने से श्वसन तंत्र साफ होता है और बलगम निकालने में मदद मिलती है.
इसके एंटीसेप्टिक और एंटीफंगल गुण मुंहासे, फोड़े-फुंसी और फंगल इन्फेक्शन को ठीक करने में सहायक हैं.
घावों पर लगाने से संक्रमण का खतरा कम होता है और घाव जल्दी भरते हैं.
इसकी तीव्र गंध मच्छरों और कीटों को दूर रखती है. यह एकाग्रता बढ़ाने का भी काम करती है.
इसे सीधे त्वचा पर नहीं लगाना चाहिए. इससे जलन या एलर्जी हो सकती है. इसे किसी अन्य तेल के साथ उपयोग करें.
आंखों के पास या आंखों में न लगाएं, क्योंकि यह जलन पैदा कर सकता है.
अधिक मात्रा में उपयोग उल्टी, चक्कर या एलर्जी का कारण बन सकता है. बच्चों और गर्भवती महिलाओं से दूर रखना चाहिए.