क्या AI हमारे दिमाग को धीरे-धीरे कर रहा है सुस्त? रिसर्च से हुआ चौंकाने वाला खुलासा!
आजकल छात्र से लेकर प्रोफेशनल तक AI का इस्तेमाल धड़ल्ले से कर रहे हैं- लेख लिखने से लेकर प्रेजेंटेशन बनाने तक हर काम में, लेकिन इसकी एक ‘छिपी कीमत’ भी सामने आ रही है.
MIT की एक नई स्टडी के मुताबिक, जो छात्र लेखन में AI टूल्स का इस्तेमाल करते हैं, उनके दिमाग के रचनात्मक और ध्यान केंद्रित हिस्से कम सक्रिय रहते हैं.
EEG मशीन से रिकॉर्ड की गई ब्रेन एक्टिविटी में सामने आया कि AI से मदद लेने वाले छात्र अपने ही लिखे कंटेंट को याद नहीं रख पा रहे थे, यानी समझ और याददाश्त पर असर.
Microsoft Research की एक और स्टडी में 319 लोगों ने 900 से ज्यादा कामों में AI का इस्तेमाल किया. लेकिन केवल 555 काम ही ऐसे थे, जिनमें सोच की जरूरत पड़ी. बाकी “ऑटो-पायलट मोड” में हो गए.
स्विट्ज़रलैंड के प्रोफेसर माइकल गर्लिक ने ब्रिटेन के 666 लोगों पर शोध किया. उन्होंने पाया कि जो लोग AI पर ज्यादा भरोसा करते हैं, उनकी गहराई से सोचने की ताकत कम हो रही है.
इस प्रक्रिया को “Cognitive Offloading” कहा जाता है- यानी जब हमारा दिमाग मुश्किल कामों की जिम्मेदारी AI पर डाल देता है और खुद कम मेहनत करने लगता है.
टोरंटो यूनिवर्सिटी के एक एक्सपेरिमेंट में AI से प्रेरित आइडिया देने वाले लोगों के सुझाव सामान्य और दोहराए गए थे. जबकि बिना AI वाले आइडिया ज्यादा अनोखे और क्रिएटिव थे.
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि AI को “Final Answer” न समझें. इसे एक असिस्टेंट की तरह इस्तेमाल करें जो सोचने की प्रक्रिया में आपका साथ दे, आपकी जगह न ले.
भविष्य की AI टेक्नोलॉजी ऐसी हो सकती है जो आपको खुद सोचने पर मजबूर करे- जवाब न दे, सवाल पूछे. तभी बनेगी AI और इंसान की स्मार्ट जोड़ी.