उन्होंने आगे कहा, "मुझे कई समस्याओं से गुज़रना पड़ा और मैंने कई मौके गँवा दिए. पीएचडी करते समय, मैंने असिस्टेंट प्रोफ़ेसर के पद के लिए केरल लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास की, शॉर्टलिस्ट में शामिल हुआ और आखिरकार अपनी जगह पक्की कर ली."
2021 में, शारदा ने 3 दिसंबर, अंतर्राष्ट्रीय विकलांग दिवस पर , 'विकलांगता पर चुनिंदा विमर्शों में विशेषाधिकार की राजनीति' नामक अपनी डॉक्टरेट थीसिस प्रस्तुत की. इस थीसिस में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि समाज विकलांगता को किस नज़रिए से देखता है.
वो आगे लिखती हैं, "विकलांगता व्यक्तियों की कोई सीमा नहीं है", बल्कि एक सामाजिक संरचना है. शारदा ने बताया, "विकलांगता अध्ययन एक ऐसा क्षेत्र है जो मानवतावादी दृष्टिकोण का उपयोग करता है, यह इस बात पर चर्चा करता है कि विकलांगता का अर्थ सीमा नहीं है."