मंदिर को दैवीय निवास और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है. मंदिर में पवित्रता, शुद्धता और शांति बनाए रखने के लिए कई चीजों को मंदिर के भीतर ले जाने की मनाही होती है.
धार्मिक दृष्टि से मंदिर को ईश्वरीय स्थान है, यहां ध्यान, भक्ति और एकाग्रता की आवश्यकता होती है, फोन के इस्तेमाल से एकाग्रता भंग होती है. पास में फोन रहने से नजर बार-बार फोन पर ही टिकी रहेगी, जिससे कि पूजा-पाठ या ध्यान में बाधा उत्पन्न होगी.
शास्त्रों की बात करें तो, शास्त्र के नीति नियम सदियों पहले बनाए गए हैं, जब आपके और हमारे पास मोबाइल भी नहीं थे. इसलिए प्राचीन शास्त्रों में मोबाइल को लेकर कोई उल्लेख मिलना संभव नहीं है
हालांकि कुछ श्लोक में इस प्रकार के व्यवहारिक नियमों का उल्लेख मिलता है- "शौचाच मनः संयमो भक्तिः, शुद्ध वस्त्रं समाहितः। तेनैव देवपूजा कार्यं, धर्मोऽयं सनातनः॥"
अर्थात् - देव पूजन में मानसिक एकाग्रता, शुद्धता और अनुशासन जरूरी है. इससे यह स्पष्ट होता है भगवान की पूजा करते समय ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए या कोई वस्तु पास नहीं रखनी चाहिए, जिससे कि एकाग्रता और शुद्धता भंग हो.
* अगर आप धार्मिक स्थल में मोबाइल लेकर जाते हैं तो यह सुनिश्चित करें कि मोबाइल फोन साइलेंट या स्विच ऑफ हो. * मंदिर में दर्शन या पूजा-पाठ के दौरान बार-बार फोन निकालकर मैसेज या न देखें. * कई मंदिरों में फोन जमा कराने के मोबाइल काउंटर होते हैं, आप वहां अपने फोन जमा करवा सकते हैं. * मंदिर में मंदिर प्रशासन की नीतियों का पालन करना चाहिए.