Nag Panchami 2025: कालसर्प दोष से मुक्ति का शुभ दिन, जानें पूजा विधि, मंत्र और उपाय
नाग पंचमी मंगलवार, 29 जुलाई को मनाई जाएगी. पंचमी तिथि की शुरुआत 28 जुलाई को रात 11:24 बजे और समाप्ति 30 जुलाई को रात 12:46 बजे होगी. पूजा का शुभ समय सुबह 6:14 से 8:51 तक रहेगा.
सनातन परंपरा में नाग देवता को शिव का प्रतीक माना जाता है. इस दिन नागों की पूजा करने से पापों का नाश होता है और जीवन में शांति व समृद्धि आती है.
जन्मकुंडली में जब सभी ग्रह राहु और केतु के बीच फंस जाते हैं, तो कालसर्प दोष बनता है. इससे जीवन में रुकावटें, मानसिक अशांति, करियर और वैवाहिक जीवन में परेशानियां बढ़ जाती हैं.
यह दिन उन लोगों के लिए अत्यंत शुभ होता है जिनकी कुंडली में कालसर्प दोष है. नाग देवता और शिवजी की पूजा से इस दोष का प्रभाव कम होता है या पूरी तरह समाप्त हो सकता है.
इस दिन शिवलिंग पर कच्चा दूध चढ़ाएं, नाग देवता की मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराएं. रुद्राभिषेक करें, महामृत्युंजय मंत्र या नाग गायत्री मंत्र का जाप करें.
‘ॐ रां राहवे नमः’ और ‘ॐ कें केतवे नमः’- इन दोनों मंत्रों का बराबर संख्या में जाप करने से राहु-केतु की स्थिति शांत होती है और दोष का प्रभाव कम होता है.
घर की सफाई में गाय का गौमूत्र, समुद्री नमक और फिटकरी मिलाकर पोंछा लगाएं. गुग्गल की धूप दें और भैरव बाबा को सरसों के तेल का दीपक चढ़ाएं.
इस दिन श्रीमद्भागवत पुराण, हरिवंश पुराण और दुर्गा सप्तशती का पाठ करना विशेष पुण्य देने वाला होता है. ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दान करें.
नाग पंचमी पर की गई श्रद्धा-पूर्वक पूजा जीवन की कई बाधाओं को दूर करती है. शिव कृपा से साधक को मानसिक शांति, सुख और संतान संबंधी सुख भी प्राप्त होता है.