Kalaki Jayanti 2025: कब आएंगे भगवान विष्णु के अंतिम अवतार? जानिए इसका रहस्य और प्रतीक
कल्कि जयंती हर साल श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाई जाती है. यह पर्व भगवान विष्णु के अंतिम और भविष्य के अवतार को समर्पित होता है.
शास्त्रों के अनुसार, जब कलियुग में अधर्म, पाप और अन्याय अपने चरम पर पहुंच जाएगा, तब भगवान विष्णु कल्कि रूप में अवतरित होकर धर्म की पुनर्स्थापना करेंगे.
कल्कि अवतार का उद्देश्य केवल दुष्टों का संहार नहीं, बल्कि समाज में नैतिकता, न्याय और शांति की वापसी करना है, एक नए सतयुग की शुरुआत करना.
विष्णु पुराण, भागवत पुराण और भविष्य पुराण में कल्कि अवतार का वर्णन मिलता है. माना जाता है कि वे शंभल ग्राम में विष्णुयश नामक ब्राह्मण के घर जन्म लेंगे.
उनके पास सफेद घोड़ा ‘देवदत्त’ और हाथ में चमकती हुई तलवार ‘नंदक’ होगी. वे अधर्म का नाश करके सतयुग की स्थापना करेंगे.
कलियुग की कुल अवधि 4,32,000 वर्ष मानी गई है, जिसमें अभी सिर्फ लगभग 5126 वर्ष ही बीते हैं. इस आधार पर कल्कि अवतार हजारों वर्षों बाद होगा.
कई विद्वानों का मानना है कि ‘शंभल ग्राम’ उत्तर प्रदेश के संभल जिले में स्थित हो सकता है, जबकि कुछ लोग इसे नेपाल या तिब्बत से भी जोड़ते हैं.
आधुनिक युग में कल्कि का मतलब केवल अवतार नहीं, बल्कि एक चेतना है – जब समाज में अन्याय बढ़ता है, तो परिवर्तन की आशा को ‘कल्कि’ कहा जाता है.
कल्कि जयंती हमें याद दिलाती है कि जब-जब अधर्म बढ़ेगा, तब-तब धर्म की रक्षा हेतु चेतना जागेगी. यह पर्व केवल भविष्य का नहीं, वर्तमान का भी संदेश है.