बिल्व पत्र के अलावा भगवान शिव को कौन सी पत्तियां प्रिय हैं?

भगवान शिव ने विषपान किया था, जिसके बाद उनके शरीर की जलन को शांत करने के लिए ठंडे जल से अभिषेक किया गया था.

सावन सोमवार के दिन प्रातःकाल स्नान के बाद पूजा का संकल्प लें और भगवान शिव की पूजा करें.

शिवलिंग का अभिषेक जल, दूध, शहद, घी, दही, गंगाजल और शक्कर से पंचामृत बनाकर करें.

अभिषेक के बाद बिल्व पत्र, भांग, सफेद फूल, और आंकड़े के फूल अर्पित करें.

शिवलिंग पर बिल्व पत्र के साथ ही शमी और दूर्वा भी चढ़ाया जा सकता है.

भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए "ऊँ नमः शिवाय" और महामृत्युंजय मंत्र का जप करें.

पूजा में भगवान को मिठाई का भोग लगाएं और आरती करें. भगवान से जानी-अनजानी गलतियों के लिए क्षमा मांगें.

पूजा के बाद अन्य भक्तों को प्रसाद बांटें और खुद भी लें. इस दिन भोजन, वस्त्र, दक्षिणा और अन्य सामग्री दान करना शुभ रहेगा.

भगवान शिव के व्रत और पूजा करने शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि और शांति आती है.