NDRF क्यों पहनती है ऑरेंज कलर का यूनिफॉर्म? यहां जानिए वजह!

NDRF यानी National Disaster Response Force को भारत के आपदा-प्रबंधन कानून, 2005 के तहत बनाया गया था. 2006 में इसकी शुरुआत हुई और अब यह भारत की प्रमुख रेस्क्यू टीम बन चुकी है.

ऑरेंज रंग तेज और साफ दिखाई देता है. बाढ़, धुंध, बारिश या अँधेरे में एनडीआरएफ वालेंटियर्स आसानी से नजर आते हैं, जिससे उन्हें खोजने में दिक्कत न हो. इसी वजह से NDRF ऑरेंज यूनिफॉर्म पहनती है.

जेब्रा क्रॉसिंग, नदी किनारे, टूटे भवन जैसी आपदा जगहों पर यह रंग दूर से भी पहचान में आ जाता है, जिससे फंसे लोगों को बचाना आसान हो जाता है.

पूरे देश में NDRF की टीमें एकरूप यानि एक जैसे कपड़े पहनती हैं. इससे टीम वर्क और मानसीकता मजबूत होती है, और लोग उन्हें एक भरोसेमंद रेस्क्यू टीम मान लेते हैं.

इनकी वर्दी पर भारत का तिरंगा झंडा भी नजर आता है. इससे पता चलता है कि ये सरकारी अधिकारी हैं. इस यूनिफॉर्म से एसेंस ऑफ़ ड्यूटी और जिम्मेदारी भी झलकती है.

रीक्वेस्ट मिलने पर जब टीम जल्दी पहुंचती है और उनका ऑरेंज रंग नजर आता है, तो प्रभावित लोग बरामदगी और रेस्क्यू में भरोसा जगा लेते हैं.

एनडीआरएफ के जवान CAPF (CRPF, BSF, CISF, ITBP, SSB) से भेजे जाते हैं और उन्हें गहरी ट्रेनिंग दी जाती है, जैसे की फर्स्ट रिस्पॉन्डर, केमिकल/बायोलॉजिकल इमरजेंसी, ढह चुकी संरचना से रेस्क्यू आदि.

ऑरेंज का रंग ऐसा है जिसे हर मौसम और माहौल में आसानी से पहचान सकते हैं. इससे रेड या ग्रीन जैसे रंगों की तुलना में कहीं ज्यादा फायदा होता है.

एनडीआरएफ की वर्दी में ऑरेंज इसलिए अपनाया गया ताकि रेस्क्यू ऑपरेशन में हर वक्त विज़िबिलिटी, पहचान और एकरूपता बनी रहे और ये टीम आपकी जान बचा सके.