कहीं आप तो नहीं खा रहे हैं खतरनाक आटा? जानिए कैसे बचेगी सेहत
मानसून में नमी के कारण आटे और गेहूं में सीलन पैदा हो जाती है. सीलन के कारण कीड़े या बीटल के पनप जाते हैं.
इस तरह के गेंहू से बना आता खाने या आते से पेट दर्द, गैस, फूड पॉइजनिंग या पाचन की समस्या हो सकती है.
खराब आटे से हल्की बासी या सड़ी हुई गंध के साथ रंग थोड़ा भूरा या मटमैला हो जाता है.
खराब आटा थोड़ा नम या चिपचिपा हो जाता है. कुछ समय बाद इसे चालने में घुन या छोटे कीड़े दिखाई देने लगते हैं.
अगर आटे से खराब बदबू आए या उसका रंग थोड़ा बदला हुआ लगे तो उसे कतई नही खाना चाहिए.
अब सवाल आता है कि अगर ऐसे आते को नहीं खाएंगे तो इसे बचाए कैसे? आइये हम इसकी जानकारी देते हैं.
आटे को बचाने के लिए कम मात्रा में पिसवाएं और सूखी जगह में रखें. एयरटाइट कंटेनर में रखें, नीम पत्ती या तेजपत्ता रखें.
आटे को निकालने के लिए सूखा चम्मच उपयोग करें. साथ ही आटा भरने से पहले डिब्बे को अच्छे से सुखाएं.
गेहूं को पिसाने से पहले तेज धूप में 2–3 दिन सुखाएं. इसके बाद उसे अच्छे से छीन लें.
अगर गेहूं रखना है तो उसमें नीम की सूखी पत्तियां, तेजपत्ता या लौंग डालकर एयरटाइट कंटेनर में रखें.
सबसे खास बात की नए पुराने आटे और नए पुराने गेंहू आपस में न मिलाएं. इससे आपकी सेहत बची रहेगी.