भारत के वो अजीब और हैरान करने वाले कानून जिन पर आपको नहीं होगा विश्वास

क्या आपको पता है? अंग्रेज़ों के ज़माने में बने कुछ अजीब कानून आज भी किताबों में मौजूद हैं. कुछ बदले गए, लेकिन कुछ वैसे ही हैं. चलिए जानते हैं ऐसे ही 9 मज़ेदार और हैरान करने वाले कानून!

आत्महत्या का प्रयास = जेल भारतीय दंड संहिता की धारा 309 कहती है, अगर आपने आत्महत्या की कोशिश की और बच गए… तो जेल भी हो सकती है. मतलब ज़िंदगी से हारने पर भी सज़ा!

कबूतर से चिट्ठी भेजना? गुनाह भारतीय डाकघर अधिनियम, 1898 के मुताबिक पहले सिर्फ सरकार ही चिट्ठी भेज सकती थी. कूरियर तो छोड़ो, कबूतर से चिट्ठी भेजना भी गैर-कानूनी था.

सड़क पर 10 रुपये मिले? पुलिस को दो! भारतीय खजाना निधि अधिनियम, 1878 कहता है कि अगर आपको 10 रुपये या उससे ज्यादा का नोट सड़क पर मिले और मालिक न मिले, तो पुलिस को बताना पड़ेगा.

शादी 21 में, गोद 18 में! भारतीय वयस्कता अधिनियम, 1875 के हिसाब से शादी की उम्र 21 साल है, लेकिन कोई बच्चा गोद लेने की उम्र सिर्फ 18 साल. अजीब न?

शराब की अलग-अलग उम्र भारत के हर राज्य में शराब पीने की उम्र अलग है, कहीं 18, कहीं 21, तो कहीं 25. मतलब एक ही देश में तीन-तीन वयस्कता की परिभाषाएं!

टिड्डियां भगाने के लिए ड्रम बजाओ पूर्वी पंजाब कृषि कीट अधिनियम, 1949 के मुताबिक, अगर दिल्ली में टिड्डियां बढ़ जाएं तो आपको ड्रम बजाने के लिए बुलाया जा सकता है. मना किया तो जुर्माना या जेल!

दांत चमकदार नहीं? नौकरी कैंसल! भारतीय मोटर वाहन अधिनियम, 1914 में ट्रैफिक पुलिस इंस्पेक्टर बनने के लिए दांत चमकदार और पैर की उंगलियां सीधी होना जरूरी था.

20 लोग एक साथ नाच नहीं सकते थे विद्रोहात्मक बैठक निवारण अधिनियम, 1911 के तहत, 20 से ज्यादा लोग साथ में नाच नहीं सकते थे. यहां तक कि देशभक्ति की किताब बांटना भी गुनाह था.

ग्रेजुएट बनो तो क्लर्क, निरक्षर भी बन सकता है वित्त मंत्री वित्त मंत्रालय का नियम है, बैंक में क्लर्क बनने के लिए ग्रेजुएट होना जरूरी. लेकिन वित्त मंत्री बनने के लिए पढ़ा-लिखा होना जरूरी नहीं.

तो अगली बार जब कोई कहे कि “कानून सबके लिए बराबर हैं”, तो ये पुराने कानून याद कर लेना. कौन जानता है, आपके शहर में भी कोई ऐसा अजीब नियम आज भी मौजूद हो!