पहली बार कर रहे हैं राधा अष्टमी का व्रत तो इन बातों का रखें ध्यान, जानें क्या है नियम?
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी को राधा अष्टमी कहते हैं. यह दिन ब्रज, मथुरा, बरसाना और वृंदावन में राधा रानी के प्रकटोत्सव की तरह मनाया जाता है.
राधा जी को भक्तों का मार्गदर्शक माना जाता है. श्रद्धा से यह व्रत रखने पर जीवन में प्रेम, सौभाग्य और शांति बढ़ती है. लेकिन अगर आप पहली बार व्रत कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान रखान जरूरी है.
सुबह उठकर नित्य स्नान करें और साफ़ पीला या हल्का लाल कपड़ा पहनें. शांत मन से व्रत का संकल्प लें और मन में भक्ति का इरादा रखें.
दिनभर फलाहार या केवल जल ग्रहण करें; नमक न लें तो उत्तम. क्रोध, झूठ और नकारात्मकता से दूरी बनाकर रखें.
राधा-कृष्ण की मूर्ति/चित्र सजाएँ, फूल-चन्दन और दीप रखें. हल्की सी आरती करें और भजन या कथा में समय बिताएँ.
भोग में मालपुआ, मिठाई, रबड़ी, केसर वाली खीर और ताज़े फल रखें. भोग स्वच्छ और श्रद्धा के साथ सूझ-बूझ से तैयार करें.
भोग देते समय मन से यह मंत्र जपें:“त्वदीयं वस्तु गोविन्द तुभ्यमेव समर्पये. गृहाण सम्मुखो भूत्वा प्रसीद परमेश्वर.”
व्रत वाले दिन दान करें — फल, अनाज या वस्त्र देना शुभ है. व्रत को मन की शुद्धि समझें, न कि केवल शरीर का कष्ट.
राधा अष्टमी प्रेम और भक्ति का त्योहार है. सच्चे मन से की हुई पूजा जीवन में सौभाग्य और प्रेम बुला लाती है राधे राधे!