Radha Ashtami 2025: क्यों आज लाडली जू को लगाया जाता है अरबी का भोग?
राधा अष्टमी भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी को कहते हैं. मथुरा, बरसाना और वृंदावन में इसे बड़े प्यार से मनाते हैं.
राधा जी को कृष्ण की ह्लादिनी शक्ति माना जाता है, प्रेम और भक्ति की अधिष्ठात्री. इस लिए राधा का नाम जपना कृष्ण के सानिध्य का मार्ग माना जाता है.
लोग मानते हैं कि राधा अष्टमी का व्रत रखने से वैवाहिक दिक्कतें दूर होती हैं, दांपत्य जीवन में सुकून आता है और संतान-संबंधी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं.
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, लाल या पीला वस्त्र पहनें और भक्ति-भाव से संकल्प लें. दिनभर फल, दूध, मेवे या पानी सेवन करें. नमक और अनाज से परहेज बेहतर माना जाता है.
पूजा स्थान साफ करें, राधा-कृष्ण की मूर्ति या तस्वीर रखें, पंचामृत से अभिषेक करें, नए वस्त्र पहनाएँ और श्रृंगार करें.
भोग में आमतौर पर खीर, माखन-मिश्री, फल और मिठाई रखते हैं, पर राधा अष्टमी पर अरबी का भोग खास माना जाता है. अरबी एक कंद वाली सब्जी है और भगवती को यह विशेष प्रिय मानी जाती है.
कहा जाता है कि राधा रानी को अरबी प्रिय है और इसे चढ़ाने से विशेष पुण्यफल मिलता है, इसलिए मंदिरों व घरों में अरबी भोग लगाया जाता है.
पूजा के दौरान मंत्र-जप से भक्ति और बढ़ती है. “ॐ वृषभानुज्यै विधमहे, कृष्णप्रियायै धीमहि, तन्नो राधा प्रचोदयात.” इम मंत्र का जाप करें.
अगले दिन व्रत का पारण हल्का सात्विक भोजन करके करें. सच्चे मन से की गई पूजा जीवन में सुख-शांति और सौभाग्य लाती है. राधे राधे!