जानें कब आपके लिए एक बड़ी समस्या बन सकता है पीरियड्स का दर्द!
पीरियड्स में हल्के-फुल्के क्रैम्प्स आम हैं. ये गर्भाशय की सिकुड़न की वजह से होते हैं, ताकि एंडोमेट्रियम बाहर निकल सके.
शरीर में ज़्यादा प्रोस्टाग्लैंडिन बनने से गर्भाशय की मांसपेशियां ज़ोर से सिकुड़ती हैं और दर्द और भी बढ़ जाता है.
अगर पीरियड्स में दर्द इतना तेज हो कि रोजमर्रा के काम रुक जाएं, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए.
अगर पीरियड्स में दर्द इतना तेज हो कि रोजमर्रा के काम रुक जाएं, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए.
दर्द के साथ उल्टी, दस्त, चक्कर या बुखार जैसा महसूस हो, तो यह किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है.
अगर हर घंटे पैड या टैम्पॉन बदलना पड़ रहा है, बड़े-बड़े थक्के निकल रहे हैं या पीरियड्स हफ्ते से ज़्यादा चल रहे हैं, तो डॉक्टर से जरूर मिलें.
असहनीय और लंबे समय तक रहने वाला दर्द कभी-कभी एंडोमेट्रियोसिस, एडेनोमायोसिस या पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज का लक्षण भी हो सकता है.
दर्द इतना बढ़ जाए कि पेनकिलर भी असर न करें, तो यह भी चेतावनी संकेत है. इसे इग्नोर करना आपकी सेहत के लिए सही नहीं.
अगर पीरियड्स का दर्द आपकी पढ़ाई, नौकरी या सोशल लाइफ को प्रभावित करने लगे, तो तुरंत मेडिकल मदद लेनी चाहिए.
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि पीरियड का दर्द सामान्य है या खतरनाक, यह तभी समझ आएगा जब आप शरीर के संकेतों पर ध्यान देंगे. समय रहते डॉक्टर से सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित है.