आपको मालूम हे भगवान विष्णु ने क्यों लिया था वामन अवतार? राजा बलि से जुड़ा है कनेक्शन

वामन जयंती हिंदू धर्म में भगवान विष्णु के वामन अवतार का जन्मोत्सव है, जो भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है.

वामन भगवान विष्णु के पाँचवें अवतार हैं, जो बौने या छोटे कद के थे वामन अवतार लेने का मुख्य उद्देश्य ब्रह्मांड में संतुलन स्थापित करना था.

त्रेता युग में एक नया रूप धारण कर चुके हैं वे एक युवा ब्राह्मण बालक के रूप में प्रकट हुए एक छोटे से बौने जिसका नाम वामन था मनमोहक मुस्कान और हाथ में लकड़ी का छत्र लिए.

बलि नामक एक शक्तिशाली असुर राजा ने स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल लोक पर विजय प्राप्त कर ली थी बुद्धिमान और उदार होने के बावजूद, उसकी महत्वाकांक्षाएँ बेकाबू होती जा रही थीं. 

उसने देवताओं को प्रसन्न करने के लिए धार्मिक अनुष्ठान किए और दिव्य आशीर्वाद प्राप्त किए जिससे वह अजेय हो गया.

जल्द ही देवता भी उससे भयभीत हो गए हताश होकर उन्होंने ब्रह्मांड के पालनहार भगवान विष्णु से मदद की गुहार लगाई.

वे एक युवा ब्राह्मण बालक के रूप में प्रकट हुए एक छोटे से बौने जिसका नाम वामन था हाथो में लकड़ी का छत्र लिए वामन मासूमियत बिखेर रहे थे.वे बलि के भव्य यज्ञ में गए.

वामन ने राजा बलि के यज्ञ में पहुंचकर उससे तीन पग भूमि दान में मांगी बलि के गुरु शुक्राचार्य ने चेतावनी दी थी लेकिन राजा बलि ने अहंकारवश अपने गुरु शुक्राचार्य की चेतावनी को अनसुना कर दिया.

बलि द्वारा दान देने पर वामन ने विशाल रूप लेकर एक पग में स्वर्ग और दूसरे में पृथ्वी नाप ली, फिर तीसरा पग बलि के सिर पर रखकर उन्हें पाताल लोक भेज दिया.