सुकून भरी और पर्याप्त नींद लेना हर व्यक्ति के लिए बहुत ज़रूरी है, क्योंकि यह दिन भर की ऊर्जा और अच्छे मूड के लिए महत्वपूर्ण है.
रात में आर्टिफिशियल लाइट जलाकर सोने से सेहत को कई तरह के नुकसान हो सकते हैं.
हाल ही में हुई एक स्टडी के अनुसार, रात में आर्टिफिशियल लाइट में सोने से खून में शुगर का स्तर बढ़ सकता है और मेटाबॉलिज्म पर भी बुरा असर पड़ता है.
शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग तेज लाइट में सोते हैं, उनमें इंसुलिन का स्तर बढ़ा हुआ होता है, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है और टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है.
आर्टिफिशियल लाइट ऑटोइम्यून नर्वस सिस्टम को सक्रिय कर देती है, जिससे कार्डियोवस्कुलर (हृदय संबंधी) कार्यों पर नकारात्मक असर पड़ता है.
रिसर्च के मुताबिक, तेज रोशनी में सोने वाले लोगों की नींद की गुणवत्ता (क्वालिटी) कम हो जाती है.
यह समस्या मुख्य रूप से शहरी लोगों में देखी जाती है जो तेज रोशनी में सोना पसंद करते हैं.
रात में लाइट जलाकर सोने से शरीर की क्लॉक (बॉडी क्लॉक) अलर्ट मोड में रहती है, जिससे दिमाग में मेलाटोनिन हार्मोन का उत्पादन कम हो जाता है.
डॉक्टरों के अनुसार, हर व्यक्ति को 7 से 9 घंटे की नींद लेनी चाहिए ताकि वह बीमारियों से बचा रह सके.
पर्याप्त नींद शरीर को रिपेयर करने, मांसपेशियों को रिकवर करने और मूड को अच्छा रखने में मदद करती है, जो बच्चों की ग्रोथ के लिए भी जरूरी है.