कोहिनूर के बाद दूसरा सबसे कीमती हीरा दरिया-ए-नूर को माना जाता हैं. रिपोर्ट के अनुसार कहा जा रहा है कि यह हीरा बांग्लादेश के सरकारी सोनाली बैंक की तिजोरियों में कहीं रखा हुआ है.
कोहिनूर की तरह दरिया-ए-नूर भी भारत के उन खदानों से आया जिनसे कोहिनूर को भी निकाला गया था. यह एक 26 कैरेट का हीरा है, जो आकार में आयताकार मेज के जैसा दिखता है.
दरिया-ए-नूर को महाराजा रणजीत सिंह द्वारा पहना गया था. वे दोनों हीरों को कोहिनूर और दरिया-ए-नूर एक साथ पहनते थे, इसीलिए दरिया-ए-नूर को कोहिनूर की बहन कहा जाता है.
दरिया-ए-नूर का आज तक कोई भी स्पष्ट चित्र सामने नहीं आया. 1951 में एक इलस्ट्रेशन लंदन न्यूज में प्रकाशित हुआ था, लेकिन वह भी केवल रेखाचित्र था.
दरिया-ए-नूर को लेकर अलग-अलग दावे कोहिनूर और दरिया-ए-नूर को अक्सर दुनिया के दो सबसे मूल्यवान हीरे माना जाता है. इनका इतिहास इनके स्वामित्व को लेकर लड़ाइयों से भरा पड़ा है.
दरिया-ए-नूर अपनी शुद्धता, दुर्लभ सुंदरता और ऐतिहासिक महत्व के कारण आज भी कीमती हीरों में गिना जाता है. कोहिनूर के बाद इसका नाम इसकी अनमोल विरासत को और मजबूत बनाता है.