क्या है लद्दाख की पारंपरिक 'पो चा' चाय, क्यों इसे अनोखा मानते हैं लोग? 

पो चा चाय लद्दाख कि वो नमकिन पेय है जो हिमालय की ऊंचाई पर कड़कड़ाती सर्दी में, पहाड़ों में जिमा संभव करती है.

यह अनोखी पो चा चाय शरीर और आत्मा दोनों कि रक्षा करती है. लद्दाख के हर घर और मठ में पो चा कि केतली हमेशा तैयार मिलती है. 

यह कोई मामूली चाय नहीं है ये लद्दाख कि हजारों साल पुरानी परंपरा का हिस्सा है और मेहमानवाजी कि पहचान भी है. 

पो चा चाय कि पत्तियां याक का दुध और नमक के मिश्रन से बनती है. चाय नमकिन है पर रखें स्वास्थ का ख्याल और दे दिव्यता का स्वाद है. 

माना जाता है कि इस चमत्कारी पोचा को पीकर साधु महिनों बिना कुछ खाए-पिए ध्यान में लीन रहते थे.

पो चा का नमक शरीर को जरूर जलयोजन यानी हाइड्रेशन देती है. यह ऊंचाई पर प्राणवायु कि कमी और कमजोरी से भी दूर रखती है.

याक के मक्खन से ऊर्जा और जरूरी केलरी मिलती है. लद्दाख कि पतली हवा और कठोर ठंड में भी शरीर को गर्मी मिल जाती है. 

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह लद्दाखी पो चा शरीर में eletrolytes का सही संतुलन बानए रखती है. यह वो ओषधी है जो ऐसे मुश्किल वातावरण में भी जिवन संभव बनाती है. 

यात्रियों का कहना है कि सिर्फ कुछ ही घूंट पिते ही इंसान फिर से ऊर्जानवित हो जाता है. पो चा सिर्फ चाय नहीं जीवन अमृत है. 

पो चा लद्दाख कि ऊंचाईयों पर सेहत का राज और महमानवाजी को खास बनाने में मदद करता है. इस सादी सी चाय के हर घूंट में है प्रभु का अमृत वास.