प्रेमचंद की गोदान 1936 में प्रकाशित हुई,जिसका अनुवाद अंग्रेजी में 1987 में हुआ, जिसमें भारतीय समाज और परिवार की दशाओं को शब्दों में ब्यान किया है.
श्रीलाल शुक्ला की रागदरबारी गांव-देहात के ऊपर लिखा गया ये पुस्तक आज़ादी के बाद के भारत की तस्वीर को दिखाता है, जिसके लिए इसे 1970 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाज़ा गया था.
मोहन राकेश का आषाढ़ का एक दिन कालिदास और मल्लिका के प्रेम पर लिखी गई ये पुस्तक जो एक नाटक है जिसको समाज की परिस्थितियों व वर्तमान हालातों से जोड़कर देखा जा सकता है.
भीष्म साहनी का तमस पुस्तक जिसे 2002 में साहित्य अकादमी और 1998 में पदम भूषण से सम्मानित किया जिसमें विभाजन के दौरान हो रही घटनाओं को केंद्र में रखकर अराजकता को जुबान दी है.
खुशवंत सिंह की पाकिस्तान मेल 1947 के विभाजन की पीड़ा को दिखाता यह उपन्यास एक गांव की कहानी है, जिसमें जग्गा अंत में नायक बनकर उभरता है.
कमलेश्वर का कितने पाकिस्तान 2003 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया यह उपन्यास हिंदू-मुस्लिम संबंधों पर आधारित है.
धर्मवीर भारती का गुनाहों के देवता शुरूआती दौर में सबसे ज़्यादा पढ़े जाने वाला ये उपन्यास का नायक चंदर सुधा से एक तरफ़ा मोहब्बत करता है लेकिन किसी कारण उसका प्यार अंजाम तक नहीं पहुंच पाता और वह गुनाह का अभियुक्त हो जाता है.
अमृता प्रीतम की पिंजर पंजाबी भाषा में लिखा ये उपन्यास एक हिंदू लड़की पूरो और मुस्लिम लड़के राशिद की प्रेम कहानी दिखाता है. इस पुस्तक को राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है.