विंध्यवासिनी देवी मंदिर मान्यता है कि 51 शक्तिपीठों में से एक यह मंदिर राक्षस महिसासुर का वध करने के बाद देवी ने विंध्याचल के पर्वत पर निवास किया था.
शाकंभरी देवी मंदिर 51 पवित्र शक्तिपीठों में गिनी जाने वाली यह मेदिर अकाल ग्रस्त पृथ्वी लोक से भूख और प्यास के प्रकोप को दूर कर दिया था, मान्यता है कि यहां दर्शन करने से दरिद्रता, रोग और दुख दूर हो जाते हैं.
देवीपाटन मंदिर इस शक्तिपीठ कि मान्यता है कि माता सती का वाम स्कंध के साथ पट गिरा था इसलिए इस स्थान को पाटन कहा गया. इस स्थान को दिव्यता और प्राचीनता का प्रतीक माना जाता है.
मां तरकुलहा मंदिर मान्यता है कि यहां माता की प्रतिमा धरती से स्वयं प्रकट हुई है. यहां श्रद्धालु जो भी मनोकामना लेकर आते हैं, वे पूरी होती हैं.