आज विश्वकर्मा जयंती है और ब्रह्मांड के पहले शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा का जन्मोत्सव मनाया जाता है.
आज देश भर में कुशल कामगार औजार और हथियार का प्रयोग करने वाले लोग विश्वकर्मा भगवान की पूजा करते हैं.
औजार और हथियार का प्रयोग करने वाले लोग अपने औजारों और हथियारों को साफ करके उनकी पूजा करके प्रसाद चढ़ाते हैं.
इस दिन विश्वकर्मा भगवान की पूजा के साथ उनकी कथा पढ़ने व सुनने से आपकी पूजा संपन्न मानी जाती है आइए जानते हैं विस्तार से यह कथा.
पौराणिक कथा कहती है कि सृष्टि की शुरुआत में भगवान विष्णु प्रकट हुए उनकी नाभि से एक कमल निकला था.
जिससे ब्रह्मा जी प्रकट हुए ब्रह्मा जी के पुत्र वास्तुदेव थे जो धर्म की पत्नी वस्तु से जन्मे सातवें पुत्र थे वास्तुदेव की पत्नी अंगिरसी से ऋषि विश्वकर्मा का जन्म हुआ.
विश्वकर्मा जी को सृष्टि के प्रथम शिल्पकार माना जाता है उन्होंने देवताओं के लिए कई अद्भुत निर्माण किए.
भगवान विश्वकर्मा ने विष्णु का सुदर्शन चक्र, रावण का पुष्पक विमान और द्वारका शहर बनाया उनकी शिल्पकला और वास्तुकला के कारण उन्हें देवताओं का वास्तुकार कहा जाता है.
भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि के प्रथम शिल्पकार के रूप में पूजा जाता है और उनकी याद में विश्वकर्मा पूजा मनाई जाती है.