इंदौर के इस मंदिर में मन्नत पूरी होने पर अर्पित करते हैं नीबुओं की माला जानें कारण
1975 में बना यह मंदिर शहर के मिल क्षेत्र में प्रसिद्ध स्वदेशी मिल मां कालका मंदिर पूर्वी और श्रमिक क्षेत्र की आस्था का बड़ा केंद्र है.
मां कालका की मूर्ति स्थापना के लिए विशेष काले पत्थर का चयन किया गया था साथ ही जयपुर के कारीगर द्वरा पत्थर को तराशकर भव्य मूर्ति का निर्माण किया था.
कालका मंदिर में देवी मां का स्वरूप बहुत ही आकर्षक है और मंदिर का तोरण द्वार भी काले पत्थरों से निर्मित है.
इंदौर की कपड़ा मिलों के मजदूर की छुट्टी होती तो वे मिल के द्वार के समीप बैठकर बातें करते या भजन किया करते थे.
स्वदेशी मिल गेट के पास 15 फीट गहरा गड्डा मजदूरों ने भरकर 1973 में यहां चबूतरा बनाया.
1975 में मजदूरों के सहयोग से मूर्ति स्थापित हुई और इस कार्य में कमलाकांत पांडे का विशेष योगदान रहा.
मंदिर में मां काली को 51 और 108 हरे नीबू के माला पहनाई जाती है, जो मंदिर के बाहर लगी दुकानों पर मिलती है.
भक्त अपने दुःख और तकलीफों मां से कहते हैं और जब उनका निवारण हो जाता है या मन्नत पूर्ण हो जाती है तो वे नीबू की माला एवं पूजन सामग्री समर्पित करते हैं.
नीबू की माला चढ़ाने के लिए मंगलवार, शनिवार, अमावस्या और पूर्णिमा को विशेष महत्व रहता है.