लंकापति रावण की गिनती सबसे शक्तिशाली योद्धाओं और प्रकांड विद्वानों में की जाती है परंतु उसके बुरे कर्म के कारण उसे अंत का सामना करना पड़ा.
रावण को पराजित करना बहुत ही कठिन लक्ष्य था, क्योंकि रावण के पास दिव्य शक्तियां और अस्त्र-शस्त्र थे.
युद्ध के दसवें दिन भगवान राम ने ब्रह्मास्त्र का इस्तेमाल कर रावण की नाभि पर निशाना साधा, जिससे वह गिर पड़ा.
रावण ने अपने अंतिम सांस लेते समय उसने तीन बार राम का नाम लिया ताकि उसे अपने पापों से मुक्ति मिल सके.
रावण का अंतिम संस्कार उसके छोटे भाई विभीषण ने किया था. जबकि शुरुआत में उसने अपने बड़े भाई रावण के पापी कर्मों के कारण अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया था.
श्री राम के समझाने पर कि मृत्यु के साथ ही पार्थिव शरीर से जुड़े सारे पाप भी समाप्त हो जाते हैं और शत्रुता भी समाप्त हो जाती है तब विभीषण ने रावण का अंतिम संस्कार किया था.
रावण के सभी पुत्र युद्ध में मारे गए थे, इसलिए विभीषण के अलावा, रावण का अंतिम संस्कार करने वाला कोई नहीं था.
रावण की मृत्यु के बाद भगवान राम के आदेश पर उनके भाई विभीषण लंका के राजा बने और अपने ज्ञान और न्याय के साथ लंका पर शासन किया.
रावण की मृत्यु होने के बाद उसकी पत्नी मंदोदरी का विवाह विभीषण के साथ हो गया था.