हर साल असम के इस शहर में खुदखुशी कर लेते हैं हजारों पक्षी! रहस्यमयी है ये घाटी

असम के जतिंगा गांव में होती है एक अजीब घटना, जिसे सुनकर लोग हैरान रह जाते हैं. हर साल सितंबर और अक्टूबर के बीच यहां हजारों पक्षी खुदकुशी कर लेते हैं.

जी हां, जतिंगा घाटी में हर साल शाम 7 से रात 10 बजे के बीच पक्षी खुद को पेड़ों और इमारतों से टकराकर मार लेते हैं.

वैज्ञानिकों का मानना है कि कोहरा, नमी और तेज हवाएं मिलकर ऐसी स्थिति पैदा करती हैं जिससे पक्षी भ्रमित होकर रोशनी की तरफ दौड़ जाते हैं और टकरा जाते हैं.

ये चौंकाने वाली बात है कि जतिंगा से 2 किलोमीटर दूर दूसरे गांवों में ऐसा कुछ नहीं होता. मानो ये रहस्य सिर्फ यहीं तक सीमित है.

गांववालों का कहना है कि इस दौरान हवाओं में कोई अदृश्य शक्ति होती है जो पक्षियों को कंट्रोल कर लेती है. इसीलिए वे इसे आध्यात्मिक मानते हैं.

पक्षियों की यह खुदकुशी की घटना साल 1910 से देखी जा रही है. पहली बार 1957 में इस पर वैज्ञानिक ध्यान गया जब पक्षी विज्ञानी E.P. Gee यहां आए.

कई बार रोशनी बंद की गई, गाड़ियां रोकी गईं और घायल पक्षियों का इलाज भी हुआ, लेकिन कोई तरीका अब तक काम नहीं आया.

लगभग 40 से ज्यादा पक्षी प्रजातियां इस दौरान इस घटना का हिस्सा बनती हैं. खास बात ये है कि इनमें प्रवासी पक्षी भी शामिल होते हैं.

इतनी कोशिशों और शोधों के बावजूद आज तक इस घटना की असली वजह नहीं समझ पाई है विज्ञान. जतिंगा आज भी पक्षियों की रहस्यमयी मौत का राज बना हुआ है.