मुगल के इस पूर्वज ने कर दी क्रूरता की हदें पार, जानें
मध्य एशिया के दो शासकों मंगोल शासक चंगेज खां (तेमूजिन) और तैमूर लंग (टीमूर-ए-लंग) के अभियान दुनिया के इतिहास में असाधारण क्रूरता के प्रतीक हैं.
चंगेज खान 13वीं सदी का एक मंगोल योद्धा था जो मंगोल साम्राज्य का संस्थापक था.वह मुगल सल्तनत की नींव रखने वाले बाबर की मां की ओर से दसवां परदादा था.
वहीं तैमूर ने तैमूरी साम्राज्य की स्थापना की. बाबर तैमूर का ही परपोता था.
चंगेज खां के किस्से ख़्वारज़्मिया का नगर उर्गेन्च टूटने के बाद मंगोलों ने बड़ी संख्या में निवासियों का संहार किया और शिल्पियों को चुनकर अलग कर लिया.
मर्व में आत्मसमर्पण के बाद भी बड़े पैमाने पर नरसंहार हुआ हत्या के बाद खोपड़ियों के मीनार बनाए जाते थे ताकि दूर-दराज के शहरों में डर फैलाया जा सके और वे आसानी से आत्मसमर्पण कर दें.
चंगेज के एक पोते की बामियान की घेराबंदी में मौत हो गई थी जिसके कारण मंगोलों ने शहर को पूरी तरह से नष्ट कर दिया. व्यक्तिगत क्षति मंगोलों के प्रतिशोध को और भी क्रूर बना देती थी.
मंगोल की युद्ध में जान-बूझकर पीछे हटना एक प्रमुख रणनीति थी जिसका इस्तेमाल शत्रुओं को शहर से बाहर मैदान में खींचकर घेरने के लिए किया जाता था.
वे अक्सर बंदियों को मानवीय ढाल के रूप में भी इस्तेमाल करते थे ताकि विजय सुनिश्चित की जा सके.
चंगेज़ खां ने यासा (कानून) से अपनी सेना में कठोर अनुशासन लागू किया.अनुशासन ने न केवल जीत आसान की बल्कि विरोधियों के मन में डर की स्थायी दीवार भी खड़ी की.