हार्ट अटैक अक्सर रात में या सुबह क्यों आता है?

हार्ट अटैक अक्सर रात या सुबह-सुबह क्यों आता है? इसके पीछे शरीर की सर्केडियन रिदम और कुछ शारीरिक बदलाव जिम्मेदार होते हैं.

रात 2 से 5 बजे के बीच, हमारा ब्लड प्रेशर और हृदय की धड़कनें सबसे धीमी होती हैं. हृदय कमजोर हो तो यह रक्त प्रवाह में दबाव डाल सकता है.

सुबह-सुबह कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ने से रक्त गाढ़ा हो जाता है और प्लेटलेट्स चिपकने लगते हैं, जिससे ब्लड क्लॉट का खतरा बढ़ता है.

खर्राटे और सांस में रुकावट (स्लीप एपनिया) से रात में ऑक्सीजन की कमी हो सकती है. इससे दिल पर अचानक स्ट्रेस पड़ सकता है.

रात में भारी खाना खाने के बाद लेटने से एसिड रिफ्लक्स होता है. दिनभर का तनाव भी हाई ब्लड प्रेशर और अनियमित धड़कन पैदा करता है.

रात में सीने में भारीपन, बाईं बांह या जबड़े में दर्द, ठंडा पसीना, अचानक सांस फूलना या चक्कर जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से मिलें.

अर्जुन की छाल का काढ़ा या चूर्ण दूध में उबालकर पीने से हृदय की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और ब्लड फ्लो संतुलित रहता है.

लहसुन कोलेस्ट्रॉल कम करता है. तुलसी और शहद रक्त में ऑक्सीजन बढ़ाते हैं और हृदय की थकान घटाते हैं.

रात में 10 मिनट ध्यान या श्वास अभ्यास (अनुलोम-विलोम, भ्रामरी) करने से हृदय की गति स्थिर रहती है और मानसिक शांति मिलती है.

अचानक सीने में भारीपन हो तो गुनगुना पानी या अजवाइन और काला नमक लें. घबराहट में गहरी सांसें लें और सीधे बैठे रहें.