काम के दबाव से लेकर चिंता तक, ये थेरेपी है रामबाण
आधुनिक समय में टेक्नोलॉजी ने काम को भले ही आसान कर दिया हो, मगर यह कई मानसिक समस्याओं की वजह भी बन चुका है
अनियमित दिनचर्या, गैजेट्स पर बढ़ती आत्मनिर्भरता और काम के लोड के बीच दिमागी रूप से फिट रहना एक चुनौती की तरह है
ऐसे में दिमाग को ठीक रखने में मदद करता है आर्ट थेरेपी
फिल्म निर्माता- लेखिका ताहिरा कश्यप आर्ट थेरेपी को बेस्ट थेरेपी मानती हैं
उन्होंने अपनी पेंटिंग को देखकर कहा कि हम जो अंदर महसूस करते हैं, वह कागज पर अपने आप उभर आता है
आर्ट थेरेपी से तनाव, चिंता, डिप्रेशन सब दूर होते हैं और मन में नई एनर्जी आती है
आर्ट थेरेपी की साइकोलॉजिस्ट भी सलाह देते हैं. रंगों से खेलना, ड्रॉइंग करना या मिट्टी के बर्तन बनाना. ये सब तेजी से असर करता है