बंपर पैदावार पर दुनिया में क्यों पिछड़ रहा है भारतीय गेहूं?

रबी सीजन की फसल तैयार है और करीब 4 साल बाद निर्यात पर लगा प्रतिबंध हटने के बावजूद भारतीय गेहूं ग्लोबल मार्केट में पिछड़ रहा है.

गेहूं का MSP 2,585 रुपये प्रति क्विंटल होने से भारतीय गेहूं अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगा पड़ रहा है.

भारतीय गेहूं विदेशी बाजारों से करीब 45 डॉलर प्रति टन महंगा है और MSP से कम खरीद न होने के कारण लागत बढ़ गई है.

मध्य पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया तक पहुंचते-पहुंचते भारतीय गेहूं 305-308 डॉलर प्रति टन पड़ता है, जबकि दुनिया में यह 260 डॉलर में उपलब्ध है.

11.5% प्रोटीन वाला भारतीय गेहूं काला सागर क्षेत्र के गेहूं से लगभग 20 डॉलर महंगा है.

25 लाख टन निर्यात लक्ष्य के बावजूद ऊंची लागत के कारण विदेशी खरीदार ढूंढ़ना बेहद मुश्किल हो गया है.

सड़क या रेल मार्ग से बांग्लादेश को गेहूं भेजने पर कीमत करीब 283 डॉलर प्रति टन पड़ेगी, जो भारत के लिए बेहतर विकल्प है.

बांग्लादेश को अधिकतम एक लाख टन निर्यात अनुमानित है, इसलिए 25 लाख टन लक्ष्य के लिए G2G सौदे की जरूरत पड़ सकती है.

FCI के पास 31 मार्च तक 10 साल के उच्चतम स्तर 21 मिलियन टन तक गेहूं स्टॉक पहुंच सकता है.

2022 में उत्पादन घटने पर निर्यात रुका था, अब 2025-26 में उत्पादन 117.95 मिलियन टन है, लेकिन बिना सब्सिडी निर्यात करना बेहद कठिन है.