क्या आप जानते हैं? आपकी पसंदीदा जलेबी भारतीय नहीं है!

आपने जलेबी जरूर खाई होगी. सुबह के नाश्ते में दूध या पोहे के साथ, किसी शादी में मिठाई की थाली में या त्योहारों पर मिठास बढ़ाने के लिए. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह रस भरी मिठाई भारतीय नहीं है?

जी हां! जलेबी की जड़ें भारत में नहीं, बल्कि पश्चिम एशिया में हैं

'जलेबी' शब्द की उत्पत्ति अरबी और फारसी शब्द 'ज़लाबिया' या 'ज़ुलबिया' से मानी जाती है. इतिहासकारों के मुताबिक, जलेबी का पहला ज़िक्र 10वीं सदी में एक अरबी कुकबुक 'Kitab al‑Tabeekh' में मिलता है

यह मिठाई ईरान, तुर्की और अरब देशों में रमजान और अन्य उत्सवों में बांटी जाती थी

भारत में यह मिठाई मध्यकालीन व्यापारियों और सूफी संतों के जरिए आई और धीरे-धीरे यहां की संस्कृति का हिस्सा बन गई

भारत में जलेबी को हर राज्य ने अपने स्वाद के अनुसार बदला और अपनाया. जैसे गुजरात में इसे फाफड़ा-जलेबी, मध्य प्रदेश में पोहा-जलेबी और दक्षिण भारत में इमरती या जंगिरी कहते हैं

यह स्वादिष्ट मिठाई भारत की संस्कृति में ढल गई और समृद्ध हो गई. अब उसे हर हिंदुस्तानी मिठाई की तरह गले लगाता है और यह जलेबी भारत की प्रसिद्द और प्रिय मिठाई बन चुकी है