Labour Day 2026: मजदूरों के संघर्ष से सम्मान तक की पूरी कहानी

दुनिया भर में हर साल 1 मई को 'अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस' या 'मई दिवस' मनाया जाता है, जो मजदूरों के संघर्ष और उनके योगदान को समर्पित है.

इस दिन की जड़ें 1886 के शिकागो के 'हेमार्केट मामले' से जुड़ी हैं, जहां मजदूरों ने 8 घंटे काम की मांग को लेकर बड़ा आंदोलन किया था.

भारत में पहली बार 1 मई 1923 को चेन्नई (तब मद्रास) में 'लेबर किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान' द्वारा मजदूर दिवस मनाया गया था.

इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की थीम "स्वस्थ मनोसामाजिक कार्य वातावरण सुनिश्चित करना" है.

साल 2026 की थीम कार्यस्थल पर तनाव, बर्नआउट और मानसिक स्वास्थ्य के जोखिमों को प्रबंधित करने और कर्मचारियों की भलाई पर केंद्रित है.

यह दिन उस ऐतिहासिक जीत का प्रतीक है जिसने दुनिया भर में काम के घंटों को सीमित कर '8 घंटे काम, 8 घंटे मनोरंजन और 8 घंटे आराम' का नियम लागू करवाया.

भारत में इसे 'अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस' या 'कामगार दिवस' भी कहा जाता है, जहां कई राज्यों में इस दिन सार्वजनिक अवकाश होता है.

यह दिन बाल श्रम, वेतन विसंगति और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा दिलाने जैसे मुद्दों पर आवाज उठाने का एक मंच है.

इस अवसर पर ट्रेड यूनियन और संगठन रैलियां निकालते हैं और श्रमिकों के लिए बेहतर वर्किंग कंडीशन और उचित वेतन की मांग करते हैं. मई दिवस केवल आंदोलन का दिन नहीं, बल्कि समाज के बुनियादी ढांचे को खड़ा करने वाले मेहनतकश मजदूरों के प्रति आभार व्यक्त करने का दिन है.