आम का बादशाह भारत, फिर भी एक्सपोर्ट में पीछे क्यों?

भारत हर साल लगभग 24 मिलियन मीट्रिक टन आम पैदा करता है, जो पूरी दुनिया के कुल उत्पादन का करीब 50% है.

इतनी भारी पैदावार के बावजूद, भारत अपने कुल उत्पादन का 1% से भी कम हिस्सा (लगभग 0.13%) विदेशों में निर्यात करता है.

लंदन और न्यूयॉर्क में भारतीय आम कम मिलने का कारण दूरी नहीं, बल्कि भारत की अपनी जबरदस्त खपत है. भारतीय अपने आम किसी और को देना ही नहीं चाहते.

जहां भारत दुनिया का छठा बड़ा निर्यातक है, वहीं कम पैदावार के बावजूद मैक्सिको दुनिया का नंबर-1 आम निर्यातक बना हुआ है.

 इंटरनेट पर जब यह आंकड़े वायरल हुए, तो यूजर्स ने मजाकिया अंदाज में कहा कि भारत 'स्ट्रेट ऑफ मैंगोज' (आमों का रास्ता) कभी नहीं खोलेगा.

सख्त अंतरराष्ट्रीय नियम, महंगा हवाई किराया और कोल्ड-स्टोरेज की कमी भारतीय आम को विदेशों में बहुत महंगा बना देती है.

भले ही ताजा आम भेजने में हम पीछे हों, लेकिन मैंगो पल्प के मामले में भारत दुनिया का सबसे बड़ा खिलाड़ी है और 55% बाजार पर कब्जा रखता है.

भारत का आम बाजार 2025 तक करीब $2.90 अरब तक पहुंचने का अनुमान है, जो देश की कृषि आय का बड़ा हिस्सा है.

यूपी और आंध्र प्रदेश मिलकर देश के आधे से ज्यादा आमों का उत्पादन करते हैं. सोशल मीडिया पर चर्चा यही है कि भारत अपने बेहतरीन आमों को निर्यात करने के बजाय खुद खाकर खुश है.