दिल्ली ही नहीं, देश में 5 जगहों पर भी हैं Jantar Mantar!
दिल्ली का जंतर-मंतर अक्सर चर्चा में रहता है, पर क्या आप जानते हैं कि यह देश की इकलौती ऐसी जगह नहीं है? 18वीं शताब्दी में देश के कई हिस्सों में ऐसी शानदार वेधशालाएं बनवाई गई थीं.
इन्हें करीब 300 साल पहले जयपुर के महाराजा सवाई जयसिंह ने बनवाया था. वे अंतरिक्ष और ग्रहों की एकदम सटीक जानकारी चाहते थे, इसलिए उन्होंने छोटे धातु के औजारों की जगह बड़े पत्थरों से इन्हें बनवाया.
यह नाम संस्कृत के 'यंत्र' और 'मंत्र' शब्दों से मिलकर बना है, जिसका मतलब है गणना करने या नापने वाले उपकरण. इनसे सूर्य, चंद्रमा और तारों की चाल पर नजर रखी जाती थी.
महाराजा सवाई जयसिंह ने अपनी खगोलीय दिलचस्पी के चलते उत्तर भारत के कुल 5 शहरों में इन वेधशालाओं का निर्माण करवाया था. आइए जानते हैं वे पांच शहर कौन से हैं.
सूची में पहला नाम राजधानी दिल्ली का है. कनॉट प्लेस के पास स्थित यह सबसे पुराना जंतर-मंतर है, जिसे 1724 में बनवाया गया था. पुराने समय में इससे साल के सबसे बड़े दिन और रात का पता लगाते थे.
जयपुर का जंतर-मंतर सभी में सबसे बड़ा और बेहतरीन हालत में है. इसे 1734 में बनवाया गया था. अपनी नायाब वास्तुकला के कारण इसे 2010 में UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित किया गया था.
जयपुर वाले जंतर-मंतर में दुनिया की सबसे बड़ी पत्थर की धूपघड़ी (वृहत् सम्राट यंत्र) है. हैरानी की बात यह है कि यह घड़ी मात्र 2 सेकंड की सटीकता के साथ एकदम सही समय बताती है!
मध्य प्रदेश का उज्जैन प्राचीन काल से समय गणना का केंद्र रहा है. यहाँ 1725 में जंतर-मंतर बना था. उज्जैन को इसलिए चुना गया क्योंकि यह प्राचीन भारत के भूगोल के बिल्कुल बीचों-बीच स्थित था.
वाराणसी में गंगा नदी के तट पर मानमंदिर घाट के ऊपर यह जंतर-मंतर बना है. 1737 में बने इस जंतर-मंतर का आकार थोड़ा छोटा है, लेकिन नदी किनारे इसकी लोकेशन बेहद खूबसूरत है.
महाराजा जयसिंह ने कुल 5 शहरों में इन्हें बनवाया था, पर आज सिर्फ 4 ही बचे हैं. पाँचवाँ जंतर-मंतर उत्तर प्रदेश के मथुरा में था, जो 1857 की क्रांति से पहले ही टूट-फूटकर नष्ट हो गया था.