क्या सच में गुम चोट का पक्का इलाज है हल्दी वाला दूध? जानिए सच

सदियों से अंदरूनी चोट, दर्द और सर्दी-जुकाम में हल्दी वाला दूध पीने की सलाह दी जाती रही है.

हल्दी में 'कर्क्यूमिन' नाम का तत्व होता है, जो एक पावरफुल एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट है.

दूध में मौजूद फैट (वसा) शरीर में कर्क्यूमिन को बेहतर तरीके से अवशोषित (Absorb) करने में मदद करता है.

कर्क्यूमिन शरीर के इंफ्लेमेटरी पाथवे को नियंत्रित कर अंदरूनी सूजन और मांसपेशियों के दर्द को कम करता है.

इसके एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं.

शोध बताते हैं कि हल्की अंदरूनी चोट और मांसपेशियों की रिकवरी में हल्दी वाला दूध वास्तव में असरदार है.

यह फ्रैक्चर, गंभीर अंदरूनी ब्लीडिंग या गहरे जख्म का इलाज नहीं कर सकता, ऐसे में डॉक्टर के पास जाएं.

बैक्टीरियल इंफेक्शन में यह शरीर को सपोर्ट तो देता है, लेकिन डॉक्टर की दी गई दवाओं की जगह नहीं ले सकता.

ब्लड थिनर लेने वाले, किडनी/गॉलब्लैडर स्टोन के मरीज और प्रेग्नेंट महिलाएं डॉक्टर की सलाह पर ही इसे लें.