आपकी रसोई में तो नहीं आ गया बैन चाइनीज लहसुन? ऐसे पहचानें अंतर

भारत सरकार ने स्वास्थ्य जोखिमों के कारण 2014 में ही चीनी लहसुन को देश में पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया था. 

जागरूकता की कमी और पहचान न होने के कारण यह खतरनाक लहसुन आज भी बाजार में गैर-कानूनी तरीके से बिक रहा है. 

शोध के मुताबिक चीनी लहसुन में फंगल इंफेक्शन की शिकायत पाई गई थी, जो शरीर के मेटाबॉलिज्म को नुकसान पहुंचाती है. 

इसकी खेती में अत्यधिक रसायनों, खतरनाक फर्टिलाइजर्स और पेस्टिसाइड्स का इस्तेमाल किया जाता है. 

चीनी लहसुन को ज्यादा चमकदार और सफेद दिखाने के लिए ब्लीचिंग और क्लोराइड लीचिंग प्रक्रिया से गुजारा जाता है. 

भारत ही नहीं, बल्कि अमेरिका की पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) ने भी इसके इस्तेमाल को लेकर चेतावनी जारी की हुई है. 

शोधकर्ताओं के अनुसार, अत्यधिक केमिकल युक्त लहसुन से नर्वस सिस्टम डैमेज, हॉर्मोनल असंतुलन और कैंसर का खतरा बढ़ जाता है. 

भारतीय देसी लहसुन स्वाद में तीखा और तेज गंध वाला होता है, जबकि चीनी लहसुन की गंध न के बराबर और स्वाद काफी फीका होता है. 

वैज्ञानिक और जांच अधिकारी मिट्टी के नमूनों और रासायनिक परीक्षणों (Soil Test) के जरिए चीनी लहसुन की पहचान करते हैं.