फलों-सब्जियों से घटता है कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा: जानें बचाव के उपाय
कोलोरेक्टल कैंसर अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं है, खराब जीवनशैली और असंतुलित खानपान के कारण 50 वर्ष से कम उम्र के युवाओं में भी इसके मामले तेजी से सामने आ रहे हैं.
प्रोसेस्ड मीट, रेड मीट का अत्यधिक सेवन, और फाइबर की कमी इस कैंसर के मुख्य कारणों में शामिल हैं.
फलों और सब्जियों में मौजूद फाइबर मल की मात्रा बढ़ाता है, जिससे हानिकारक तत्व कोलन के संपर्क में कम समय तक रहते हैं.
फाइबर आंतों के फायदेमंद बैक्टीरिया को बढ़ावा देकर पाचन तंत्र और कोलन को स्वस्थ रखने में मदद करता है.
विभिन्न रंगों के फलों और सब्जियों में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट डीएनए को होने वाले नुकसान को रोकते हैं और कैंसर बनने की संभावना घटाते हैं.
विटामिन-सी और फ्लेवोनॉयड्स से भरपूर संतरा, मौसमी और एंथोसाइनिन युक्त बेरीज सूजन को कम कर आंतों की सुरक्षा करती हैं.
पेक्टिन फाइबर से भरपूर सेब, फाइबर और विटामिन-सी युक्त अमरूद व कीवी पाचन सुधारने और कोलन हेल्थ के लिए बेहद फायदेमंद हैं.
मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, टाइप-2 डायबिटीज, धूम्रपान और शराब का अत्यधिक सेवन भी इस कैंसर के जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है.
केवल एक खाद्य पदार्थ से कैंसर नहीं रुकता- संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, स्वस्थ वजन और समय पर स्क्रीनिंग ही दीर्घकालिक सुरक्षा की कुंजी है.