स्क्रीनशॉट लेने की आदत छीन रही आपकी याददाश्त? जानें चौंकाने वाला सच
जरूरी मैसेज, पढ़ाई के नोट्स या शॉपिंग ऑफर्स को याद रखने के बजाय तुरंत स्क्रीनशॉट लेना हमारी रोजमर्रा की आदत बन गया है.
रिसर्च के अनुसार, जब हम हर जानकारी को फोन में सेव करने लगते हैं, तो हमारा दिमाग उसे खुद याद रखने की कोशिश कम कर देता है.
दिमाग के बजाय किसी बाहरी साधन (जैसे फोन) पर जानकारी सुरक्षित करने की इस प्रक्रिया को मनोविज्ञान में Cognitive Offloading कहा जाता है.
जब हमारा मुख्य ध्यान सिर्फ 'बाद में देखने के लिए सेव करने' पर होता है, तो हम उस जानकारी को गहराई से समझने का प्रयास नहीं करते.
नेचर स्प्रिंगर के अध्ययनों में पाया गया कि केवल तस्वीर देखने की तुलना में उसका स्क्रीनशॉट लेने पर उसे याद रखने की क्षमता घट जाती है.
दिमाग की याददाश्त अनुभवों और समझ से बनती है, जबकि डिजिटल स्टोरेज सिर्फ फाइलों का संग्रह है जो दिमाग में याद रहने की गारंटी नहीं देता.
बिना पढ़े और समझे हर चीज़ सेव करने से फोन की गैलरी तो भर जाती है, लेकिन जरूरत पड़ने पर हमें कुछ याद नहीं रहता.
जरूरी दस्तावेजों को सेव करना गलत नहीं है, लेकिन अगर कोई जानकारी लंबे समय तक याद रखनी है, तो सिर्फ स्क्रीनशॉट काफी नहीं है.
मोबाइल को अपनी याददाश्त का विकल्प न बनाएं. जरूरी बातों को ध्यान से पढ़ें, समझें और दिमाग में दोहराने की आदत डालें.