शरीर को स्वस्थ रखने के लिए जितना जरूरी पौष्टिक आहार होता है, उतना ही स्वच्छ पानी पीना भी आवश्यक है. हमारे शरीर का 65-70 प्रतिशत हिस्सा पानी से बना होता है.

शरीर में पानी की इसकी कमी से डिहाइड्रेशन हो सकता है, जिससे शरीर कमजोर पड़ सकता है. पानी हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद आवश्यक है, लेकिन उतना ही महत्वपूर्ण है इसे सही तरीके से पीना.

अक्सर लोग प्यास लगने पर एक साथ अधिक मात्रा में पानी पी लेते हैं, लेकिन आयुर्वेद और विज्ञान दोनों ही धीरे-धीरे, घूंट-घूंट करके पानी पीने को अधिक लाभकारी मानते हैं.

जब हम धीरे-धीरे पानी पीते हैं, तो यह लार के साथ मिलकर पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाता है. अचानक अधिक पानी पीने से पाचन तंत्र पर दबाव बढ़ सकता है और एसिडिटी की समस्या हो सकती है.

एक साथ बहुत ज्यादा पानी पीने से शरीर उसे ठीक से अवशोषित नहीं कर पाता, जिससे अधिकतर पानी यूरिन के रूप में बाहर निकल जाता है.

थोड़ा-थोड़ा करके पानी पीने से शरीर इसे प्रभावी रूप से उपयोग कर पाता है, जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा कम हो जाता है.

अचानक अधिक मात्रा में पानी पीने से किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे विषाक्त पदार्थों का उचित तरीके से फिल्ट्रेशन नहीं हो पाता.

धीरे-धीरे पानी पीने से यह समस्या नहीं होती और शरीर को डिटॉक्स करने में सहायता मिलती है.

घूंट-घूंट करके पानी पीने से भूख नियंत्रित रहती है और पेट भरा हुआ महसूस होता है, जिससे अधिक खाने से बचा जा सकता है. यह आदत वजन घटाने और फैट कम करने में सहायक हो सकती है.

यदि आप अपने मेटाबॉलिज्म को बढ़ाना चाहते हैं, तो गुनगुना पानी घूंट-घूंट करके पीना सबसे अच्छा तरीका है. यह पाचन तंत्र को सक्रिय करता है और शरीर में ऊर्जा बनाए रखता है.

एक साथ बहुत ज्यादा पानी पीने से शरीर में सोडियम और पोटैशियम का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे ब्लड प्रेशर प्रभावित हो सकता है. धीरे-धीरे पानी पीने से यह समस्या नहीं होती और हृदय स्वस्थ बना रहता है.

अगर आप गले में खराश या बलगम की समस्या से परेशान रहते हैं, तो घूंट-घूंट करके गुनगुना पानी पीना फायदेमंद हो सकता है. यह गले को आराम देता है और बलगम निकालने में सहायक होता है.