छत पर ढेरों लौकी उगाने के आसान तरीके: आजमाएं ये सीक्रेट टिप्स
छत पर लौकी की बेल में फल न बनने या फूल सूखकर गिरने की समस्या प्राकृतिक परागण की कमी और गलत देखभाल के कारण होती है.
मादा फूल के पीछे छोटी लौकी बनी होती है, जबकि नर फूल केवल एक पतली डंडी पर खिलता है. फल बनने के लिए परागण आवश्यक है.
मधुमक्खियां न आने पर सुबह ताजे नर फूल की पंखुड़ियां हटाकर उसके पराग को मादा फूल के केंद्र में धीरे से छुआएं, जिससे फल बनने लगता है.
बेल 5-6 फीट होने पर ऊपरी सिरा काटें. साइड से निकली नई शाखाओं को दोबारा ट्रिम करने से 3G ब्रांचेस बनती हैं, जिन पर सबसे ज्यादा मादा फूल आते हैं.
जड़ों के फैलाव के लिए कम से कम 18-24 इंच का ग्रो बैग या ड्रम इस्तेमाल करें और पौधे को रोज 6-8 घंटे की सीधी धूप में रखें.
बेल के लिए हल्की, उपजाऊ और जल-निकासी वाली मिट्टी तैयार करें ताकि पानी जमा न हो और जड़ों को ऑक्सीजन मिलती रहे.
लौकी एक हैवी फीडर पौधा है, इसलिए फूल-फल आते समय हर 15 दिन में वर्मीकंपोस्ट, गोबर की खाद या सरसों की खली का लिक्विड फर्टिलाइजर डालें.
मिट्टी में हमेशा हल्की नमी बनाए रखें; अधिक पानी से जड़ें सड़ सकती हैं और पानी की कमी से फल सूखकर गिर सकते हैं.
पौधे को बीमारियों और कीड़ों से बचाने के लिए हर 15 दिन में नीम के तेल का छिड़काव करें, जिससे फल तेजी से और स्वस्थ तरीके से बड़े होंगे.