अगर आप भी खांसी और सूजन से राहत पाने के लिये करते है इस तेल का इस्तेमाल ,तो हो जाइये सावधान.
खांसी, दर्द और सूजन को दूर करने में माहिर है 'नीलगिरी', लेकिन पहले जान लें इसके साइड इफेक्ट.
प्रकृति में कई ऐसे पेड़-पौधे हैं, जो हमारे शरीर को रोगों से दूर रखते हैं. इनमें से एक है 'नीलगिरी', जिसे यूकेलिप्टस भी कहा जाता है.
यह लाभकारी पेड़ है,जिसका हर हिस्सा, खासकर इसके पत्तों से निकालने वाला तेल, औषधीय रूप में गुणकारी माना जाता है, जो कई बीमारियों में रामबाण की तरह काम करता है.
अमेरिकी नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के मुताबिक, नीलगिरी तेल पर किए गए वैज्ञानिक शोधों से पता चलता है इसका तेल बहुत खास है और इसे कई तरह की बीमारियों में इस्तेमाल किया जा सकता है.
शोधों में देखा गया कि नीलगिरी के तेल में मौजूद रसायन दर्द और सूजन कम करने में मदद करते हैं. इससे मांसपेशियों का दर्द, गठिया जैसी समस्याओं में आराम मिलता है.
इसका तेल सर्दी, खांसी और बंद नाक जैसे रोगों में भी फायदेमंद है.
यह तेल एंटीसेप्टिक और एंटीफंगल गुणों से भरपूर होता है, जो त्वचा पर होने वाले मुंहासे, फोड़े-फुंसी और फंगल इन्फेक्शन को ठीक करता है.
फायदों के साथ-साथ नीलगिरी तेल से जुड़ी कुछ सावधानियां भी बरतनी जरूरी हैं.
इसे कभी भी सीधे त्वचा पर न लगाएं, क्योंकि यह जलन या एलर्जी का कारण बन सकता है. हमेशा किसी कैरियर ऑयल के साथ मिलाकर ही उपयोग करें.
इसे आंखों के पास या आंखों में न लगाएं. इसकी तीव्र गंध और रासायनिक गुण आंखों में जलन पैदा कर सकते हैं.
इसकी अधिक मात्रा का सेवन या अत्यधिक प्रयोग न करें. ज्यादा इस्तेमाल करने से उल्टी, चक्कर या एलर्जी जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
बच्चों और गर्भवती महिलाओं को इसका उपयोग डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए.