भारतीयों में समोसा और जलेबी की दीवानगी किसी से छिपी नहीं है. जलेबी को तो लोग इतने प्यार से खाते हैं कि इसे भारत की राष्ट्रीय मिठाई तक कहा जाने लगा है. 

लेकिन हाल ही में समोसा और जलेबी अचानक देशभर में चर्चा का विषय बन गए हैं. इसकी वजह जानकर आप भी चौंक जाएंगे. 

दरअसल, भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी सरकारी कैंटीनों और रेस्टोरेंट को एक अहम आदेश जारी किया है. 

इसमें कहा गया है कि समोसा, जलेबी जैसे तले-भुने नाश्तों के साथ अब एक खास स्वास्थ्य चेतावनी बोर्ड लगाना जरूरी होगा.

इस निर्देश के तहत कैंटीन या रेस्टोरेंट में बड़े-बड़े रंगीन पोस्टर लगाए जाएंगे, जिनमें बताया जाएगा कि ये नाश्ते सेहत पर कितने हानिकारक हो सकते हैं.

यानी अब वेंडर्स को बताना होगा कि जो नास्ता वो परोस रहे हैं उसका स्वास्थ्य पर कितना बुरा प्रभाव पड़ता है या फिर उसमें कितनी चीनी या कोई और पदार्थ है. 

सरकार का मानना है कि इस कदम से लोगों में जागरूकता बढ़ेगी और मोटापा, डायबिटीज, दिल की बीमारियों जैसी समस्याओं पर काबू पाने में मदद मिलेगी. 

इसी फैसले के बाद लोगों के चहेते समोसा और जलेबी फिर से सुर्खियों में आ गए हैं. इसी बहाने यह जानना भी दिलचस्प है कि आखिर इनकी शुरुआत कहां से हुई.

भारत में जलेबी का इतिहास कई 100 साल पुराना है. हालांकि इसके जन्म की असल कहानी भारत से बाहर जुड़ी हुई है. 

जलेबी की शुरुआत पश्चिमी एशिया में मानी जाती है, जिसे आज हम ईरान के नाम से जानते हैं. वहां इसे यीस्ट डालकर बनाने की परंपरा शुरू हुई थी.