नेल पॉलिश लगाने का है शौक? खरीदने से पहले बोतल पर जरूर चेक करें ये कोड

नेल पॉलिश हाथों को सुंदर तो बनाती है, लेकिन इसमें मौजूद फॉर्मलडिहाइड, जाइलीन और कैंफर जैसे केमिकल हमारे नाखूनों को अंदर से खोखला कर सकते हैं.

नेल पॉलिश खरीदते समय हमेशा उसके लेबल पर '5-Free', '7-Free' या 'Free From' जरूर चेक करें. इसका मतलब होता है कि इसमें टॉक्सिक केमिकल्स नहीं हैं.

पॉइंटमेंट में मौजूद टोल्यूईन से सिरदर्द-चक्कर और डीबीपी  से शरीर के हार्मोन्स बिगड़ सकते हैं. वहीं जाइलीन आंखों और सांस की तकलीफ बढ़ा सकता है.

जेल नेल पेंट को सुखाने के लिए हानिकारक UV लाइट की जरूरत होती है. वहीं एक्रेलिक नेल पेंट में हेवी मेटल्स होते हैं, इसलिए इन्हें पूरे नाखून पर लगाने से बचें.

सस्ते और लोकल नेल पेंट अक्सर अपने हानिकारक इंग्रीडिएंट्स छुपा जाते हैं. हमेशा जाने-माने ब्रांड्स या 'वॉटर बेस्ड' और 'किड्स सेफ' लेबल वाली नेल पॉलिश ही चुनें.

अगर आपकी नसें नीली हैं तो पिंक और बेरी शेड्स चुनें. अगर नसें हरी हैं तो कोरल और वार्म रेड आप पर खूब जचेंगे.

डायरेक्ट नेल पेंट न लगाएं. पहले एक सुरक्षा कवच यानी बेस कोट लगाएं, फिर पतली लेयर में 2-3 कोट लगाएं और आखिर में इसे टिकाऊ बनाने के लिए टॉप कोट लगाएं.

नाखूनों से नेल पेंट को कभी भी खुरच कर न निकालें. इसके अलावा, एसिटोन वाले रिमूवर का इस्तेमाल करने से नाखून रूखे और बेजान होकर टूटने लगते हैं.

अगर नाखून पीले या पतले हो रहे हैं, उन पर सफेद चॉक जैसे धब्बे दिख रहे हैं, या आसपास सूजन है, तो समझ जाएं कि आपके नाखूनों को आराम की जरूरत है. कुछ दिन नेल पेंट न लगाएं.