हैकर्स और हैंगिंग दोनों से मिलेगी मुक्ति, रोज करें  एक छोटा काम

हम अक्सर फोन तभी रीस्टार्ट करते हैं जब बैटरी खत्म हो जाए या फोन हैंग हो. लेकिन इसकी सेहत के लिए रेगुलर रीस्टार्ट जरूरी है.

फोन चलते-चलते बैकग्राउंड में लाखों टेंपरेरी फाइल्स और कुकीज जमा कर लेता है. रीस्टार्ट इन डेड फाइल्स का सफाया कर देता है.

बैकग्राउंड में चलने वाले ऐप्स रैम पर लोड बढ़ाते हैं, जिससे फोन स्लो होता है. रीस्टार्ट होते ही रैम पूरी तरह खाली और फ्रेश हो जाती है.

क्या आपके ऐप्स अचानक चलते-चलते बंद या ग्लिच (हिचकी) करने लगते हैं? डेली रीस्टार्ट से ऐप्स स्मूथ चलते हैं और क्रैश नहीं होते.

हाइबरनेशन में रहने वाले ऐप्स भी चुपके-चुपके बैटरी चूसते हैं. रीस्टार्ट करने से ऐसे सभी हिडन ऐप्स पूरी तरह बंद हो जाते हैं.

कंपनियां जो छोटे-मोटे सिक्योरिटी पैच और सॉफ्टवेयर अपडेट्स बैकग्राउंड में पुश करती हैं, वो रीस्टार्ट के बाद ही ढंग से सेटल हो पाते हैं.

जैसे रात की अच्छी नींद हमारे दिमाग को फ्रेश कर देती है, वैसे ही रीस्टार्ट आपके स्मार्टफोन को एकदम नया और सुपरफास्ट बना देता है.

अगर रीस्टार्ट की असली ताकत समझनी है, तो रीस्टार्ट का ये नियम अपनाएं. कुछ दिन बाद आप खुद हमें 'थैंक्यू' बोलेंगे.

आज ही से आदत डालें दिन में कम से कम एक बार अपने फोन या लैपटॉप को रीस्टार्ट जरूर करें और स्लो होने की टेंशन से फ्री हो जाएं.